ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खतिया गांव के पास स्थित एक पवित्र स्थान है, जो नर्मदा नदी के किनारे बसा है। यहाँ स्थित भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग अत्यंत प्रसिद्ध है और यह नर्मदा परिक्रमा यात्रा का एक मुख्य पड़ाव है। भक्तजन यहाँ शिव भक्ति के अनूठे अनुभव के साथ नर्मदा के तटों की परिक्रमा करते हैं। इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता, मंदिर की प्राचीनता और तीर्थाटन की शांति यत्रियों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
ओंकारेश्वर नाम ‘ओंकार’ से उत्पन्न हुआ है, जो भगवान शिव के स्वरूप का एक दिव्य प्रतीक है। यह ज्योतिर्लिंग भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। नर्मदा परिक्रमा के दौरान यहां के प्राचीन मंदिरों और घाटों पर पूजा-अर्चना का माहौल भक्तों को भावविभोर कर देता है।
यहाँ की परिक्रमा यात्रा केवल धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह भक्तों के लिए मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का माध्यम भी है। नर्मदा नदी के किनारे-किनारे चलते हुए शिव भक्ति और प्रकृति के अद्भुत संगम का अनुभव होता है। कई लोग इसे जीवन की सबसे पुण्यशील यात्रा मानते हैं।
ओंकारेश्वर का तट परिक्रमा मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहाँ श्रद्धालु नर्मदा को अपनी दाईं ओर रखकर पैदल यात्रा करते हैं। इसके आसपास कई धार्मिक स्थल और पारंपरिक अस्थायी पूजा स्थान भी रहते हैं, जो पूरे मार्ग के दौरान आध्यात्मिक अनुभव को समृद्ध करते हैं।
परिक्रमा की शुरुआत से पहले श्रद्धालुओं को जल स्नान करना होता है और ‘कढ़ाई’ अर्थात् भोजन और दक्षिणा वितरण का नियम निभाना आवश्यक होता है, जिससे यात्रा सफल और शुभ मानी जाती है। यहाँ की स्थानीय संस्कृति और रीति-रिवाज यात्रा को और अधिक पावन बनाते हैं।
ओंकारेश्वर परिक्रमा के दौरान न केवल शिवजी के मंदिर दर्शन के अवसर मिलते हैं, बल्कि पर्यावरण की सुंदरता और तटवर्ती गांवों की सरलता भी यात्रा को सुखद और यादगार बनाती है। यहाँ के घाट और नदी का सुकून मन को शांति प्रदान करता है।
नर्मदा परिक्रमा यात्रा समय, धैर्य, और समर्पण की परीक्षा भी है। इस परिक्रमा में लगभग 3200 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है, जो आमतौर पर तीन वर्ष तीन महीने और कुछ दिन लगते हैं। इस लंबी यात्रा में ओंकारेश्वर एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में मार्गदर्शन करता है।
ओंकारेश्वर का शिव मंदिर वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है, जिसकी खूबसूरती और शांति पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का मन मोह लेती है। श्रद्धालु यहां महादेव का अभिषेक, पूजा और ध्यान करते हैं, जो उनकी आस्था को गहरा करता है।
इस यात्रा में स्थान-स्थान पर कई तरह के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों का आयोजन होता है, जो न केवल श्रद्धालुओं को प्रेरित करता है बल्कि स्थानीय समुदाय को भी एक साथ जोड़ता है।
नर्मदा परिक्रमा के अंतर्गत ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख स्थलों की यात्रा भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक नवजीवन लाती है। यह यात्रा श्रद्धा, विश्वास, और प्रकृति प्रेम का सुंदर मिश्रण है, जो हर यात्री के लिये यादगार बनती है।