सनातन धर्म में कार से नर्मदा परिक्रमा करना अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी संकल्प माना जाता है। दीपावली के उपरांत (कार्तिक एवं मार्गशीर्ष माह) में कार से नर्मदा परिक्रमा प्रारंभ करने पर अनुकूल मौसम, सुगम मार्ग और सभी तीर्थ घाटों पर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
परिक्रमा का मूल शास्त्रीय नियम: शास्त्रोक्त मान्यता के अनुसार कार से नर्मदा परिक्रमा करते समय माँ नर्मदा सदैव आपके दाहिने हाथ (Clockwise / प्रदक्षिणा) रहनी चाहिए। मार्ग में नदी पर बने पुलों से बीच में तट पार नहीं किया जाता। जबलपुर से दक्षिण तट से पश्चिम (विमलेश्वर समुद्र संगम) की ओर जाकर, नौका से तट परिवर्तन कर उत्तर तट से पूर्व (अमरकंटक उद्गम) होते हुए पुनः जबलपुर लौटना ही प्रामाणिक मार्ग है।
चरण 1: दक्षिण तट यात्रा (जबलपुर से विमलेश्वर सागर संगम)
- दिन 1: जबलपुर (संकल्प दिवस) – ग्वारीघाट पर परिक्रमा संकल्प, नर्मदा पूजन व महाआरती। भेड़ाघाट, धुआंधार जलप्रपात व चौसठ योगिनी दर्शन। (रात्रि विश्राम: जबलपुर)
- दिन 2: जबलपुर से बरमान घाट (नरसिंहपुर) [~130 किमी] – दीपेश्वर महादेव, सूर्यकुंड, ब्रह्मा कुटी दर्शन। (रात्रि विश्राम: बरमान घाट / नरसिंहपुर)
- दिन 3: बरमान घाट से नर्मदापुरम (होशंगाबाद) [~130 किमी] – सेठानी घाट स्नान, रामजी बाबा समाधि दर्शन। (रात्रि विश्राम: नर्मदापुरम)
- दिन 4: नर्मदापुरम से हंडिया / हरदा [~100 किमी] – रिद्धि-सिद्धिनाथ मंदिर (दक्षिण तट) दर्शन। (रात्रि विश्राम: हंडिया / हरदा)
- दिन 5: हरदा से ओंकारेश्वर (दक्षिण तट) [~140 किमी] – दक्षिण तट स्थित ‘ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग’ दर्शन व नर्मदा पूजन। (रात्रि विश्राम: ओंकारेश्वर)
- दिन 6: ओंकारेश्वर दर्शन व विश्राम – ओंकार पर्वत परिक्रमा, संगम घाट व संध्या महाआरती। (रात्रि विश्राम: ओंकारेश्वर)
- दिन 7: ओंकारेश्वर से बड़वानी [~150 किमी] – राजघाट व बावनगजा जैन तीर्थ दर्शन। (रात्रि विश्राम: बड़वानी)
- दिन 8: बड़वानी से प्रकाशा (महाराष्ट्र) [~120 किमी] – दक्षिण काशी नाम से विख्यात प्रकाशा में केदारेश्वर महादेव दर्शन। (रात्रि विश्राम: प्रकाशा / शहादा)
- दिन 9: प्रकाशा से राजपीपला / केवडिया [~160 किमी] – शूलपाणेश्वर महादेव परिसर दर्शन। (रात्रि विश्राम: राजपीपला अथवा गरुड़ेश्वर निकट)
- दिन 10: राजपीपला से अंकलेश्वर / भरूच [~90 किमी] – कबीरवड के सामने दक्षिण तट दर्शन। (रात्रि विश्राम: अंकलेश्वर)
- दिन 11: अंकलेश्वर से विमलेश्वर (सागर संगम) [~80 किमी] – माँ नर्मदा और अरब सागर का महासंगम। दक्षिण तट परिक्रमा संपन्न, संगम स्नान, पूजन व दान। (रात्रि विश्राम: विमलेश्वर / हांसोट)
चरण 2: तट परिवर्तन (समुद्र संगम पार करना)
- दिन 12: विमलेश्वर से मीठी तलाई (तट परिवर्तन दिवस)
• परिक्रमार्थी: विमलेश्वर (दक्षिण तट) से नौका द्वारा समुद्र संगम पार कर उत्तर तट ‘मीठी तलाई’ पहुँचते हैं।
• वाहन/कार: चालक भरूच के नर्मदा मैया ब्रिज से गाड़ी घुमाकर मीठी तलाई में परिक्रमार्थियों को लेने पहुँचता है।
• मीठी तलाई में उत्तर तट संकल्प व पूजन। (रात्रि विश्राम: मीठी तलाई / भरूच)
चरण 3: उत्तर तट यात्रा (मीठी तलाई से जबलपुर)
- दिन 13: भरूच से नारेश्वर [~70 किमी] – भृगु ऋषि आश्रम, दशाश्वमेध घाट, पूज्य रंग अवधूत महाराज आश्रम। (रात्रि विश्राम: नारेश्वर)
- दिन 14: नारेश्वर से गरुड़ेश्वर [~60 किमी] – प.पू. वासुदेवानंद सरस्वती (टेंबे स्वामी) महाराज समाधि मंदिर। (रात्रि विश्राम: गरुड़ेश्वर)
- दिन 15: गरुड़ेश्वर से कुक्षी / मनावर [~160 किमी] – उत्तर तट से मध्य प्रदेश में पुनः प्रवेश। (रात्रि विश्राम: मनावर / धरमपुरी)
- दिन 16: मनावर से महेश्वर [~70 किमी] – अहिल्या किला, अहिल्या घाट, सहस्त्रार्जुन मंदिर, व प्रसिद्ध संध्या आरती। (रात्रि विश्राम: महेश्वर)
- दिन 17: महेश्वर से ओंकारेश्वर (उत्तर तट) [~65 किमी] – उत्तर तट स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मुख्य मंदिर दर्शन। (रात्रि विश्राम: ओंकारेश्वर)
- दिन 18: ओंकारेश्वर से नेमावर [~130 किमी] – माँ नर्मदा का ‘नाभि स्थान’ (मध्य बिंदु)। सिद्धनाथ महादेव दर्शन। (रात्रि विश्राम: नेमावर)
- दिन 19: नेमावर (विश्राम व साधना) – नाभि कुंड स्नान, नर्मदा ध्यान व साधु-संत सेवा। (रात्रि विश्राम: नेमावर)
- दिन 20: नेमावर से बुधनी / बांद्राभान [~120 किमी] – तवा-नर्मदा संगम (बांद्राभान) उत्तर तट। (रात्रि विश्राम: बुधनी / नर्मदापुरम उत्तर)
- दिन 21: बुधनी से सांडिया घाट [~110 किमी] – प्राचीन सांडिया घाट व नर्मदा दर्शन। (रात्रि विश्राम: सांडिया / पिपरिया)
- दिन 22: सांडिया से जबलपुर (उत्तर तट – लमहेटा घाट) [~130 किमी] – लमहेटा घाट व तिलवाराघाट उत्तर तट। (रात्रि विश्राम: जबलपुर)
चरण 4: उद्गम परिक्रमा (जबलपुर से अमरकंटक व पूर्णता)
- दिन 23: जबलपुर से मंडला [~100 किमी] – सहस्रधारा जलप्रपात, महाराजपुर संगम घाट। (रात्रि विश्राम: मंडला)
- दिन 24: मंडला से डिंडोरी [~105 किमी] – कुकर्रामठ प्राचीन शिव मंदिर। (रात्रि विश्राम: डिंडोरी)
- दिन 25: डिंडोरी से अमरकंटक [~90 किमी] – माँ नर्मदा का उद्गम धाम। मुख्य नर्मदा मंदिर, उद्गम कुंड व महाआरती। (रात्रि विश्राम: अमरकंटक)
- दिन 26: अमरकंटक दर्शन – माई की बगिया, कपिलधारा, दूधधारा, सोनमुड़ा, कबीर चबूतरा। (रात्रि विश्राम: अमरकंटक)
- दिन 27: अमरकंटक साधना व विश्राम – अमरकंटक शिखर परिक्रमा, साधु सेवा व पूजन। (रात्रि विश्राम: अमरकंटक)
- दिन 28: अमरकंटक से मंडला [~150 किमी] – मनोरम घाटों से होते हुए वापसी यात्रा। (रात्रि विश्राम: मंडला)
- दिन 29: मंडला से जबलपुर (ग्वारीघाट) [~100 किमी] – जबलपुर आगमन। ग्वारीघाट पर संध्या आरती। (रात्रि विश्राम: जबलपुर)
- दिन 30: परिक्रमा उद्यापन व कन्या पूजन – ग्वारीघाट पर संकल्प विसर्जन, नर्मदा अष्टक पाठ, कन्या पूजन, साधु भोजन व महाप्रसाद वितरण। (परिक्रमा पूर्ण संपन्न!)
⚠️ कार से नर्मदा परिक्रमा के 5 अनिवार्य नियम:
- पुल से नदी पार न करें: रास्ते में किसी भी पुल से तट न बदलें। तट परिवर्तन केवल विमलेश्वर से मीठी तलाई पर ही शास्त्रसम्मत है।
- नर्मदा जल कलश: पहले दिन ग्वारीघाट से तांबे के लोटे में नर्मदा जल भरकर गाड़ी में रखें और परिक्रमा पूर्ण होने पर पुनः विसर्जित करें।
- अभिवादन: पूरी परिक्रमा में परस्पर अभिवादन के लिए केवल “नर्मदे हर!” कहें।
- सात्विक जीवन: पूर्णतः सात्विक भोजन ग्रहण करें और नदी में साबुन/शैंपू का प्रयोग न करें।
- गाड़ी की तैयारी: अमरकंटक और शूलपाणेश्वर के घुमावदार रास्तों के लिए ब्रेक व टायर जांच लें। नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन मैप डाउनलोड रखें।
नर्मदा परिक्रमा (कार द्वारा): अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न
1. क्या कार द्वारा नर्मदा परिक्रमा करना शास्त्रसम्मत है?
हाँ, शास्त्रों में पदयात्रा को सर्वोत्तम माना गया है, परंतु शारीरिक रूप से अक्षम श्रद्धालुओं, वृद्धजनों एवं समयाभाव वाले परिवारों के लिए वाहन परिक्रमा का विधान मान्य है। मुख्य नियम यह है कि माँ नर्मदा सदैव आपके दाहिने हाथ होनी चाहिए और परिक्रमा मर्यादा का पूर्ण पालन होना चाहिए।
2. रास्ते में पुल पार करके एक किनारे से दूसरे किनारे जा सकते हैं क्या?
बिल्कुल नहीं। परिक्रमा के दौरान नर्मदा नदी पर बने किसी भी पुल से तट बदलना वर्जित है। तट परिवर्तन केवल सागर संगम (विमलेश्वर से मीठी तलाई) पर नाव द्वारा ही शास्त्रसम्मत माना जाता है।
3. विमलेश्वर से मीठी तलाई पर गाड़ी कैसे पार होती है?
विमलेश्वर (दक्षिण तट) पर पहुँचकर श्रद्धालु समुद्र संगम नौका (बोट) द्वारा पार करके उत्तर तट ‘मीठी तलाई’ पहुँचते हैं। गाड़ी चालक भरूच के नर्मदा मैया ब्रिज से चक्कर लगाकर गाड़ी को मीठी तलाई लेकर आता है और श्रद्धालुओं को रिसीव करता है।
4. 30 दिन की कार परिक्रमा में कुल कितनी दूरी तय होती है?
जबलपुर से प्रारंभ होकर ओंकारेश्वर, विमलेश्वर, महेश्वर, नेमावर और अमरकंटक होते हुए पुनः जबलपुर लौटने पर कुल दूरी लगभग 3,200 से 3,600 किलोमीटर होती है।
5. रात्रि विश्राम व भोजन की क्या व्यवस्था रहती है?
लगभग हर प्रमुख घाट और तीर्थ पर परिक्रमावासियों के लिए निःशुल्क अथवा न्यूनतम शुल्क पर आश्रम, धर्मशालाएं एवं अन्नक्षेत्र उपलब्ध रहते हैं। इसके अतिरिक्त बड़े नगरों में होटल और होमस्टे की भी सुगम व्यवस्था है।